उदयपुर की नारायण सेवा संस्थान पर गंभीर सवाल: सेवा या सिस्टम में गड़बड़ी?
विशेष जांच रिपोर्ट | भारत हेडलाइन
राजकोट/उदयपुर। दिव्यांगजनों को निःशुल्क उपचार, ऑपरेशन और पुनर्वास उपलब्ध कराने का दावा करने वाली नारायण सेवा संस्थान, उदयपुर की कार्यप्रणाली को लेकर कई गंभीर शिकायतें सामने आई हैं। इन शिकायतों के आधार पर भारत हेडलाइन ने संस्थान की चिकित्सा सेवाओं, प्रशासनिक व्यवस्था, वित्तीय पारदर्शिता तथा ट्रस्ट प्रबंधन से जुड़े विभिन्न पहलुओं की तथ्यात्मक जांच प्रारंभ की है।
संस्थान में उपचार करा चुके कुछ दिव्यांग मरीजों एवं उनके परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन के बाद उन्हें अपेक्षित लाभ नहीं मिला, बल्कि कुछ मामलों में स्वास्थ्य संबंधी नई समस्याएं उत्पन्न हुईं। कुछ शिकायतकर्ताओं ने डॉक्टरों एवं स्टाफ के व्यवहार को लेकर भी असंतोष व्यक्त किया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है तथा संबंधित संस्थान का पक्ष प्राप्त किया जाना शेष है।
दान की राशि और वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल
देश-विदेश से करोड़ों रुपये का दान प्राप्त करने वाली इस चैरिटेबल संस्था की वित्तीय पारदर्शिता को लेकर भी प्रश्न उठाए जा रहे हैं। शिकायतकर्ताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा विशेष रूप से गुजराती दानदाताओं का कहना है कि दान की राशि का उपयोग, प्रशासनिक व्यय, ट्रस्ट की परिसंपत्तियां तथा वित्तीय निर्णय पूरी तरह सार्वजनिक और पारदर्शी होने चाहिए।
कुछ शिकायतों में यह भी आरोप लगाया गया है कि संस्थान से जुड़े कुछ डॉक्टरों अथवा संबंधित व्यक्तियों ने बड़े व्यावसायिक या बहुमंजिला भवन विकसित किए और उन्हें संस्थान को किराए पर उपलब्ध कराया। यदि इन दावों में तथ्य हैं, तो किराया अनुबंध, भुगतान प्रक्रिया तथा हितों के टकराव (Conflict of Interest) की स्वतंत्र जांच आवश्यक है। फिलहाल इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
गुजराती समुदाय से जुड़े मरीज और दानदाता
जानकारी के अनुसार, संस्थान में उपचार कराने वाले दिव्यांग मरीजों और दानदाताओं का एक बड़ा वर्ग गुजरात और गुजराती समाज से जुड़ा हुआ है। ऐसे में शिकायतकर्ताओं का कहना है कि संस्था के संचालन, वित्तीय व्यवस्था और चिकित्सा सेवाओं में अधिक पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि समाज का विश्वास बना रहे।
पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता
विशेषज्ञों का मानना है कि समाज के दान से संचालित किसी भी चैरिटेबल संस्था के लिए नियमित ऑडिट, आय-व्यय का सार्वजनिक विवरण, ट्रस्ट संचालन की पारदर्शिता तथा प्रशासनिक निर्णयों में जवाबदेही अत्यंत आवश्यक है। इससे दानदाताओं का विश्वास मजबूत होता है और संस्था की विश्वसनीयता बनी रहती है।
भारत हेडलाइन की जांच जारी
भारत हेडलाइन की जांच टीम उदयपुर में उपलब्ध दस्तावेजों, संबंधित अधिकारियों, मरीजों, पूर्व कर्मचारियों तथा अन्य संबंधित पक्षों से जानकारी एकत्र कर रही है। जांच के दौरान यदि किसी भी प्रकार की अनियमितता के दस्तावेजी एवं सत्यापित प्रमाण प्राप्त होते हैं, तो उन्हें तथ्यों एवं प्रमाणों के साथ प्रकाशित किया जाएगा।
साथ ही, नारायण सेवा संस्थान का आधिकारिक पक्ष भी समान प्रमुखता और निष्पक्षता के साथ प्रकाशित किया जाएगा, ताकि पाठकों के समक्ष संतुलित एवं तथ्यात्मक तस्वीर प्रस्तुत की जा सके।
अपील
यदि किसी मरीज, दिव्यांग, कर्मचारी, पूर्व कर्मचारी अथवा दानदाता—विशेष रूप से गुजराती समुदाय—के पास इस विषय से संबंधित कोई दस्तावेज, प्रमाण या व्यक्तिगत अनुभव हो, तो वे भारत हेडलाइन से संपर्क कर सकते हैं। प्राप्त जानकारी का सत्यापन करने के बाद ही उसे प्रकाशित किया जाएगा।
अस्वीकरण (Disclaimer)
यह रिपोर्ट विभिन्न शिकायतों, आरोपों एवं प्रारंभिक सूचनाओं के आधार पर तैयार की गई है। इनमें वर्णित आरोपों की पुष्टि किसी सक्षम न्यायालय अथवा सरकारी जांच एजेंसी द्वारा नहीं हुई है। भारत हेडलाइन किसी भी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा है और मामले की तथ्यात्मक जांच जारी है। संबंधित संस्था अथवा व्यक्तियों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी समान प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।











